✦ मानव ने आज तक जितना भी सोचा है वह सब साहित्य में समाया है।✦ हिंदी साहित्य की आत्मा को महसूस अवश्य कीजिए।✦ साहित्य में विषयवस्तु निश्चेष्ट हो जाती है, यदि उसमें प्राण न रहे।✦ अंधेरा है वहाँ जहाँ आदित्य नहीं है, मुर्दा है वह देश जहाँ साहित्य नहीं है।✦ सुसंभाव्य की दृष्टि-सृष्टि सदा से सृजनशील है।✦ सुसंभाव्य में चेतना के बीज का उदगार है।✦ सुसंभाव्य का निरंतर बढ़ती ऊंचाई साहित्यकारों द्वारा सदैव प्रसंशनीय है।✦ सुसंभाव्य के साथ जुड़ना बड़े गर्व की बात है।✦ सुसंभाव्य जीवन सन्दर्भों के परिपेक्ष्य में अत्यंत संवेदनशील है।✦ मानव ने आज तक जितना भी सोचा है वह सब साहित्य में समाया है।✦ हिंदी साहित्य की आत्मा को महसूस अवश्य कीजिए।span>
✦ साहित्य में विषयवस्तु निश्चेष्ट हो जाती है, यदि उसमें प्राण न रहे।✦ अंधेरा है वहाँ जहाँ आदित्य नहीं है, मुर्दा है वह देश जहाँ साहित्य नहीं है।✦ सुसंभाव्य की दृष्टि-सृष्टि सदा से सृजनशील है।✦ सुसंभाव्य में चेतना के बीज का उदगार है।✦ सुसंभाव्य का निरंतर बढ़ती ऊंचाई साहित्यकारों द्वारा सदैव प्रसंशनीय है।✦ सुसंभाव्य के साथ जुड़ना बड़े गर्व की बात है।✦ सुसंभाव्य जीवन सन्दर्भों के परिपेक्ष्य में अत्यंत संवेदनशील है।
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